महंत धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर माथुर चतुर्वेद परिषद और तीर्थ पुरोहित महासभा का फूटा गुस्सा; संपूर्ण भारत में विरोध और ब्रज में बहिष्कार की अपील।
मथुरा। बागेश्वर धाम के महंत पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के प्रति कथित रूप से व्यक्त किए गए निरादरपूर्ण भाव और टिप्पणी को लेकर धार्मिक नगरी में आक्रोश गहराता जा रहा है। इस संवेदनशील प्रकरण पर श्री माथुर चतुर्वेद परिषद के मुख्य संरक्षक एवं अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के संरक्षक, प्रमुख उद्योगपति और समाजसेवी पं. महेश चतुर्वेदी पाठक ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए धीरेंद्र शास्त्री के इस कृत्य को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।
प्रेस वार्ता के दौरान पं. पाठक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भले ही धीरेंद्र शास्त्री ने अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांग ली हो, लेकिन सिर्फ माफी मांग लेने से करोड़ों श्रद्धालुओं की आहत भावनाओं की गंभीरता कम नहीं हो जाती। इस प्रकार की अमर्यादित अभिव्यक्ति को एक सामान्य भूल मानकर बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
🕉️ श्रीकृष्ण संपूर्ण सनातन संस्कृति के प्राण हैं
पं. महेश चतुर्वेदी पाठक ने कहा, "भगवान श्रीकृष्ण केवल किसी एक समाज, संप्रदाय अथवा क्षेत्र के आराध्य नहीं हैं। वे संपूर्ण सनातन संस्कृति के प्राण, भारतीय दर्शन के आधार और विश्व मानवता के मार्गदर्शक हैं। गीता का दिव्य ज्ञान देने वाले योगेश्वर श्रीकृष्ण के प्रति किसी भी प्रकार का निरादरपूर्ण भाव व्यक्त करना पूरी मानवता और आस्था पर चोट है।"
🗣️ कथावाचकों को दी चेतावनी: लोकप्रियता के लिए मर्यादा न भूलें
देशभर के कथा वाचकों, संतों एवं धर्माचार्यों को विशेष रूप से सचेत करते हुए उन्होंने कहा:
- वाणी पर संयम: धार्मिक मंच कोई ऐसा स्थान नहीं है, जहां लोकप्रियता या तालियां बटोरने के लिए किसी भी देवी-देवता के विषय में मनमाने शब्दों का प्रयोग किया जाए। कथा वाचकों को अपनी जिह्वा पर संयम रखना चाहिए।
- शब्दों का प्रभाव: संतों के एक-एक शब्द का प्रभाव लाखों श्रद्धालुओं पर पड़ता है। इसलिए धर्म की व्याख्या करते समय भाषा की मर्यादा, शास्त्रों का ज्ञान और धार्मिक गरिमा का ध्यान रखना अनिवार्य है।
- इतिहास से लें सबक: पं. पाठक ने पूर्व में कथावाचक मुरारी बापू और प्रदीप मिश्रा से जुड़े विवादों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि समय-समय पर ऐसी टिप्पणियों से समाज में असंतोष फैला है, जिससे सभी धर्माचार्यों को सबक लेना चाहिए।
🚫 देशभर में विरोध और ब्रज में बहिष्कार का ऐलान
पंडित महेश पाठक ने कड़ा रुख अपनाते हुए घोषणा की कि अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा द्वारा संपूर्ण भारत वर्ष में धीरेंद्र शास्त्री का कड़ा विरोध किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने समस्त ब्रजवासियों से अपील की कि वे ऐसे पाखंडपूर्ण आचरण का पूर्ण रूप से बहिष्कार करें। उन्होंने याद दिलाया कि संतों और कथावाचकों का मुख्य दायित्व समाज को जोड़ना और सनातन की प्रतिष्ठा बढ़ाना है, न कि आस्था को ठेस पहुंचाना।
